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जनविश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी: लाभार्थी सम्मेलन में बोले सीएम धामी, योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव हर पात्र तक पहुंचाना लक्ष्य

देहरादून। उत्तराखंड में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित लाभार्थी सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है। यही विश्वास सुशासन की आधारशिला और विकास की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।

देहरादून में अल्पसंख्यक मोर्चा महानगर की ओर से आयोजित लाभार्थी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वरोजगार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य योजनाओं से अपने जीवन में आए बदलावों के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की बातें गंभीरता से सुनीं और कहा कि आम नागरिकों के अनुभव सरकार के लिए सबसे बड़ा फीडबैक हैं, जिनके आधार पर योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

‘विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता’

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित हुई है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पहले योजनाओं के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर बाधाएं आती थीं, लेकिन आज पारदर्शी व्यवस्था और तकनीक के उपयोग से लाभ सीधे लोगों के बैंक खातों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी इसी सोच के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

अल्पसंख्यक शिक्षा में नई व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार प्रत्येक बच्चे को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है।

उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आधुनिक, रोजगारोन्मुख और प्रतिस्पर्धी शिक्षा से जोड़ना है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि वे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने भविष्य का निर्माण कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार इसी दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।

यूसीसी का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि यूसीसी सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को मजबूत करती है। इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए न्यायपूर्ण और समान व्यवस्था सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक सुधारों के साथ विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए अनेक योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और गरीब परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए लगातार कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, आवास, पेयजल, सड़क, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनेक योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। स्वरोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों और अन्य योजनाओं के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

लाभार्थियों ने साझा किए बदलाव के अनुभव

कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। कई लाभार्थियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उन्हें अपना पक्का घर मिला, जिससे परिवार को सुरक्षित जीवन मिला है।

उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाओं ने बताया कि रसोई गैस मिलने से धुएं से मुक्ति मिली और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों ने कहा कि गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक बोझ कम हुआ और समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकी।

स्वरोजगार और कौशल विकास योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों ने बताया कि प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग से उन्हें रोजगार के नए अवसर मिले हैं। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों ने भी सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।

‘योजनाओं की जानकारी दूसरों तक भी पहुंचाएं’

मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल स्वयं योजनाओं का लाभ लेने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने गांव, मोहल्ले और समाज के अन्य पात्र लोगों को भी इनके बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक लाभार्थी एक अन्य पात्र व्यक्ति को योजना से जोड़ने का प्रयास करे तो जनकल्याणकारी योजनाओं का दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है। सरकार जनता के सुझावों और अनुभवों के आधार पर योजनाओं में आवश्यक सुधार भी कर रही है।

सरकार और जनता के बीच संवाद का मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के लाभार्थी सम्मेलन केवल योजनाओं की जानकारी देने के लिए नहीं होते, बल्कि सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम भी हैं। इससे सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और जहां आवश्यकता होती है, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत जनता के विश्वास में निहित है। जब नागरिकों को सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिलता है, तभी सुशासन की अवधारणा साकार होती है।

जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक विनोद चमोली, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं दायित्वधारी दिनेश अग्रवाल, देहरादून नगर निगम के महापौर सौरभ थपलियाल, अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता, विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सरकारी योजनाओं की सफलता केवल बजट या घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने से तय होती है। लाभार्थी सम्मेलन जैसे कार्यक्रम इसी उद्देश्य को मजबूत करते हैं, जहां सरकार सीधे जनता से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव का आकलन करती है। उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा और स्वरोजगार जैसी योजनाओं के माध्यम से व्यापक स्तर पर लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही शिक्षा सुधार, कौशल विकास और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को भी नीति निर्माण का हिस्सा बनाया जा रहा है। आगे की चुनौती यही होगी कि इन योजनाओं का लाभ दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचे तथा पात्र व्यक्ति तक सरकारी सहायता समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होती रहे।

By admin